इसी कड़ी में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की 14वीं बटालियन, नूरपुर (जिला कांगड़ा) के अंतर्गत रीजनल रिस्पॉन्स सेंटर (आरआरसी), नालागढ़ द्वारा ऑनलाइन कम्युनिटी अवेयरनेस प्रोग्राम (सीएपी) का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में जिला ऊना से 25 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें युवा स्वयंसेवक, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए), जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र (डीईओसी) तथा आपदा मित्र शामिल रहे।
उपायुक्त ने बताया कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों को आपदा की स्थिति में त्वरित, सुरक्षित एवं प्रभावी प्रतिक्रिया देने के लिए आवश्यक ज्ञान एवं व्यावहारिक कौशल से सशक्त बनाना था।
ऑनलाइन प्रशिक्षण के दौरान एनडीआरएफ के विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर), प्राथमिक उपचार (बेसिक फर्स्ट एड), आपातकालीन परिस्थितियों में उपयोगी महत्वपूर्ण संपर्क नंबरों, खोज एवं बचाव (सर्च एंड रेस्क्यू) की तकनीकों, बचाव कार्यों में प्रयुक्त मूलभूत उपकरणों एवं संसाधनों तथा एनडीआरएफ की संरचना, अधोसंरचना और कार्यप्रणाली की विस्तृत जानकारी प्रदान की। साथ ही विभिन्न प्रकार की प्राकृतिक एवं मानवजनित आपदाओं के दौरान एनडीआरएफ द्वारा किए जाने वाले राहत एवं बचाव कार्यों से भी प्रतिभागियों को अवगत कराया गया।
जतिन लाल ने कहा कि किसी भी आपदा में सबसे पहले स्थानीय समुदाय ही राहत एवं बचाव की प्रारंभिक जिम्मेदारी निभाता है। ऐसे में प्रशिक्षित युवा स्वयंसेवक और आपदा मित्र प्रशासन के सहयोगी के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम समुदाय की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ लोगों में आत्मविश्वास विकसित करते हैं और उन्हें आपदा के समय प्रभावी ढंग से कार्य करने के लिए तैयार करते हैं।
उन्होंने एनडीआरएफ की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि जिला प्रशासन भविष्य में भी ऐसे जागरूकता एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के आयोजन को प्रोत्साहित करेगा, ताकि जिले में अधिक से अधिक नागरिकों को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण देकर सुरक्षित एवं आपदा-प्रतिकारक समाज का निर्माण किया जा सके।

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