राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज लोकभवन में राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के तहत टीबी मुक्त भारत अभियान 2.0 की प्रगति की समीक्षा की। उन्हांेने राज्य की नवाचार पहलों, सामुदायिक सहभागिता और जनकेंद्रित दृष्टिकोण की सराहना करते हुए कहा कि हिमाचल राष्ट्रीय लक्ष्य से पहले क्षय रोग उन्मूलन के उद्देश्य की प्राप्ति की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है।
बैठक के दौरान राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, हिमाचल प्रदेश के उप-मिशन निदेशक एवं राज्य टीबी अधिकारी डॉ. राजेश गुलेरिया ने राज्य में कार्यक्रम के तहत संचालित की जा रही गतिविधियों और उपलब्धियों पर प्रस्तुतीकरण दिया।प्रदेश में टीबी नियंत्रण कार्यक्रम के तहत किए गए निरंतर एवं प्रभावी प्रयासों के परिणामस्वरूप वर्ष, 2024 में टीबी के 15,455 मामलों की तुलना में वर्ष, 2025 में टीबी के मामले 14,636 रह गए।
बैठक में राज्यपाल को अवगत करवाया गया कि केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने 24 मार्च, 2026 को 100 दिवसीय 'टीबी मुक्त भारत अभियान 2.0' का शुभारंभ किया था। अभियान के तहत हिमाचल प्रदेश में 5,147 उच्च जोखिम वाले गांवों की पहचान की गई, जिनमें से 2,547 गांवों (49 प्रतिशत) को आयुष्मान आरोग्य शिविरों के माध्यम से पहले ही कवर किया जा चुका है। इन शिविरों के माध्यम से उच्च जोखिम समूहों के लगभग 1.85 लाख लोगों की एआई-सक्षम हैंडहेल्ड एक्स-रे तकनीक से जांच की गई है। इससे टीबी की समय पर पहचान और शीघ्र उपचार सुनिश्चित हो रहा है।
राज्यपाल को जानकारी दी गई कि टीबी मुक्त ग्राम पंचायत पहल के तहत वर्ष, 2023 में 731 ग्राम पंचायतों, वर्ष, 2024 में 823 ग्राम पंचायतों तथा वर्ष, 2025 में 1,052 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया गया, जो रोग उन्मूलन की दिशा में निरन्तर हो रही प्रगति को दर्शाता है।
बैठक में बताया गया कि आयुष्मान आरोग्य शिविरों के माध्यम से उच्च जोखिम वाले गांवों एवं शहरी वार्डों में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाई जा रही है। इन शिविरों में टीबी, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और एनीमिया की निःशुल्क जांच के साथ-साथ एआई आधारित हैंडहेल्ड एक्स-रे की सुविधा भी उपलब्ध करवाई जा रही है। इसके अतिरिक्त, मोबाइल हेल्थ यूनिट्स राज्य के दुर्गम क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का कार्य कर रही हैं।
अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में हिमाचल प्रदेश में 26 एआई-सक्षम हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनें तथा सभी विकास खंडों में 119 आधुनिक एनएएटी डायग्नोस्टिक मशीनों के माध्यम से टीबी की त्वरित जांच और मरीजों का शीघ्र उपचार संभव हो रहा है।
राज्यपाल ने कहा कि क्षय रोग का उन्मूलन केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यह एक जनआंदोलन है, जिसमें समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय सहभागिता नितांत आवश्यक है। उन्होंने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि आयुष्मान आरोग्य शिविरों में जनप्रतिनिधियों की अधिक भागीदारी सुनिश्चित की जाए तथा विशेष रूप से उच्च जोखिम वाले लोगों को समय पर टीबी जांच, खासकर छाती के एक्स-रे के लिए प्रेरित करने हेतु जागरूकता अभियान और अधिक प्रभावी बनाए जाएं।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सामूहिक प्रयासों, सक्रिय जनसहभागिता और समय पर रोग की पहचान से हिमाचल प्रदेश शीघ्र ही टीबी मुक्त राज्य बनने का लक्ष्य हासिल करेगा।
बैठक में राज्यपाल के सचिव संदीप भारद्वाज, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के एल.आर. शर्मा तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन के राज्य सलाहकार डॉ. निशांत सोनी भी उपस्थित थे।

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