डॉ. शांडिल ने अवगत करवाया कि प्रदेश में टीबी उन्मूलन की दिशा में अल्प एवं दीर्घकालीन रणनीतियों के तहत कार्य किया जा रहा है। हिमाचल प्रदेश उच्च जोखिम वाले गांवों एवं वार्डों में संवेदनशील आबादी की स्क्रीनिंग, एक्स-रे जांच, एनएएटी टेस्टिंग, टीबी मरीजों की देखभाल जैसे मापदंडों में 75 प्रतिशतता से अधिक के साथ देश अग्रणी राज्यों में शामिल है। प्रदेश में आशा कार्यकर्ता, स्वास्थ्य कर्मियों, नि-क्षय मित्रों और जन भागीदारी से टीबी उन्मूलन अभियानों की सफलता सुनिश्चित की जा रही है। इसके अतिरिक्त सांसदों, विधायकों, जन प्रतिनिधियों और पंचायती राज संस्थाओं की सहभागिता भी सुनिश्चित की जा रही है।
टीबी उन्मूलन के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्रदेश में टीबी डायग्नॉस्टिक नेटवर्क के विस्तार सहित स्वास्थ्य संस्थानों की अधोसंरचना को सुदृढ़ किया जा रहा है। प्रदेश में टीबी के मामलों की समय पर पहचान, निदान, प्रभावी उपचार और लोगों में जागरूकता सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि टीबी मरीजों के निकट सहयोगियों और संभावित टीबी मरीजों को सुरक्षा की दृष्टि से दवाई सुनिश्चित की जा रही है।
उन्होंने केंन्द्रीय मंत्री से टीबी मुक्त हिमाचल के लक्ष्य को हासिल करने के लिए हैंड हेल्ड एक्स-रे मशीनों की उपलब्धता करवाने का आग्रह किया।
बैठक में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के प्रबंध निदेशक प्रदीप कुमार ठाकुर और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

0 Comments