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उच्च मूल्य एवं उभरती बागवानी फसलों पर एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित



मंडी, 23 सितंबर। विकास खंड सदर मंडी में उद्यान विभाग द्वारा बागवानों को पारंपरिक बागवानी फसलों के साथ-साथ उच्च मूल्य एवं उभरती संभावनाओं वाली बागवानी फसलों के प्रति प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से पहल करते हुए गत दिवस एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। प्रशिक्षण शिविर की अध्यक्षता उपनिदेशक उद्यान डॉ. संजय गुप्ता ने की।

डॉ. संजय गुप्ता ने बागवानों को बदलती बाजार मांग एवं आधुनिक बागवानी की संभावनाओं के अनुरूप उच्च मूल्य वाली एवं उभरती फसलों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने बागवानों को फसल विविधीकरण की दिशा में आगे बढ़ने तथा नई फसलों को वैज्ञानिक तकनीक एवं विभागीय मार्गदर्शन के साथ अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी नई एवं संभावनाशील फसलों के माध्यम से बागवान अपनी पारंपरिक बागवानी के साथ आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित कर सकते हैं।

उन्होंने बताया कि इस प्रशिक्षण शिविर का मुख्य उद्देश्य बागवानों को पारंपरिक फसलों जैसे जापानी फल, आड़ू, प्लम एवं नाशपाती के साथ-साथ बदलती बाजार मांग, उपभोक्ताओं की पसंद तथा पोषण संबंधी आवश्यकताओं के अनुरूप नई एवं उच्च मूल्य वाली फसलों ब्लूबेरी, ब्लैकबेरी और मैकाडेमिया नट इत्यादि को अपनाने के लिए जागरूक एवं सक्षम बनाना है। इससे बागवानों को अपनी बागवानी गतिविधियों में विविधीकरण कर आय के अतिरिक्त एवं बेहतर स्रोत विकसित करने के अवसर प्राप्त हो सकते हैं।

कार्यक्रम में डॉ. पूजा रानी गौतम, विषय विशेषज्ञ मुख्यालय तथा उद्यान विकास अधिकारी, विकास खंड सदर डॉ. शिक्षा द्वारा प्रशिक्षण सत्रों का संचालन एवं मार्गदर्शन किया गया। उन्होंने कहा कि बागवानों को पारंपरिक बागवानी से आगे बढ़कर फसल विविधीकरण, उच्च मूल्य वाली फसलों तथा बाजार आधारित बागवानी की ओर प्रेरित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

इस अवसर पर मास्टर ट्रेनर द्वारा प्रतिभागी बागवानों को ब्लूबेरी, मैकाडेमिया नट, ब्लैकबेरी सहित अन्य उच्च मूल्य एवं उभरती बागवानी फसलों के संबंध में विस्तृत तकनीकी जानकारी प्रदान की गई। प्रशिक्षण के दौरान फसलों की उत्पादन तकनीक, पौधरोपण, प्रबंधन, आवश्यक सावधानियां तथा व्यावहारिक पहलुओं पर प्रैक्टिकल डेमोंस्ट्रेशन भी दिया गया।

प्रशिक्षण के दौरान बागवानों को उद्यान विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत उपलब्ध अनुदान एवं सहायता प्रावधानों के बारे में भी जानकारी दी गई तथा नई फसलों को अपनाने के लिए विभागीय योजनाओं के माध्यम से आवेदन एवं सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया से अवगत करवाया गया।   

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