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'एक से श्रेष्ठ' पहल 650 केंद्रों तक पहुंची, शिक्षा के माध्यम से जीवन में ला रही सकारात्मक बदलावः राज्यपाल



राज्यपाल ने जमीनी स्तर पर पांच वर्षों की शैक्षणिक सेवा की सराहना की

राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज 'एक से श्रेष्ठ' पहल के लगभग पांच वर्ष पूरे होने तथा 650 शिक्षा केंद्रों का पड़ाव हासिल करने पर एक्ट टू ट्रांसफार्म फाउंडेशन को बधाई दी। इस पहल से लगभग 12,000 बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं।
राज्यपाल ने आज बिलासपुर स्थित आर्ट एंड कल्चर ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में संबोधित करते हुए कहा कि 650 केंद्र महज एक संख्या नहीं हैं, बल्कि ऐसे 650 केंद्र हैं जहां ज्ञान का प्रकाश बच्चों तक पहुंच रहा है और उन्हें बेहतर भविष्य के सपने देखने तथा उन्हें साकार करने का अवसर मिल रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि समावेशी, कुशल एवं भविष्य के लिए तैयार भारत के निर्माण में शिक्षा की केंद्रीय भूमिका है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, पीएम श्री, निपुण भारत, डिजिटल इंडिया और कौशल विकास जैसी पहलें बच्चों और युवाओं के लिए बेहतर अवसर सृजित करने के उद्देश्य से शुरू की गई हैं। उन्होंने कहा कि 'एक से श्रेष्ठ' जैसे जमीनी स्तर के प्रयास शिक्षा और सामाजिक सहभागिता को समुदायों के और करीब लाकर इस व्यापक राष्ट्रीय प्रयास को मजबूती प्रदान करते हैं।
श्री गुप्ता ने कहा कि शिक्षा बदलाव के सबसे प्रभावशाली माध्यमों में से एक है। हर बच्चे को, चाहे वह शहर में रहता हो या किसी दूरदराज गांव में, सीखने, आगे बढ़ने और अपने सपनों को साकार करने के समान अवसर मिलने चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा केवल स्कूलों तक पहुंच सुनिश्चित करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि बच्चों को सीखने के अवसर, आवश्यक संसाधन, मार्गदर्शन और आगे बढ़ने का आत्मविश्वास मिलंे। उन्होंने बच्चों को निःशुल्क शिक्षा के साथ आवश्यक शिक्षण सामग्री एवं अन्य सहायता उपलब्ध करवाने के लिए फाउंडेशन की सराहना की।
राज्यपाल ने शिक्षकों को लैपटॉप वितरित किए और उनसे आग्रह किया कि वे तकनीक का उपयोग केवल शिक्षण सहायता के रूप में न करें, बल्कि बच्चों की व्यक्तिगत सीखने की आवश्यकताओं को समझने और उनका समाधान करने के माध्यम के रूप में भी करें। बच्चों को स्टडी टेबल, स्कूल बैग, नोटबुक, स्टेशनरी, जूते और ट्रैकसूट भी वितरित किए गए।
श्री गुप्ता ने कहा कि इस प्रकार की सहायता बच्चों को यह महत्वपूर्ण संदेश देती है कि आपकी शिक्षा और आपके सपने महत्वपूर्ण हैं और समाज को आपकी क्षमताओं पर विश्वास है। उन्होंने कहा कि किसी भी सामाजिक पहल की वास्तविक ताकत उसकी इमारतों या संसाधनों में नहीं, बल्कि उन लोगों में होती है जो समर्पण के साथ उसके उद्देश्यों को धरातल पर उतारते हैं। आप केवल विषयों की शिक्षा नहीं दे रहे हैं, बल्कि अनुशासन, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और सपने देखने का साहस भी विकसित कर रहे हैं।
राज्यपाल ने सराहना करते हुए कहा कि इस पहल के माध्यम से 692 प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं, जिनमें करीब 90 प्रतिशत अवसर महिलाओं को प्राप्त हुए हैं। इनमें से लगभग 60 प्रतिशत लोगों को इस कार्यक्रम के माध्यम से पहली बार रोजगार का अवसर प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि निःशुल्क शिक्षा, पुस्तकें, स्टेशनरी, बैग, लैपटॉप और अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध करवाने से हजारों परिवारों के शैक्षणिक खर्च को कम करने में मदद मिली है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 12,000 से अधिक परिवारों ने सामूहिक रूप से 5.40 करोड़ रुपये से अधिक की बचत की है।
उन्होंने कहा कि इसकी वास्तविक उपलब्धि किसी बच्चे का आत्मविश्वास, अभिभावक की कम हुई चिंता, शिक्षक की गरिमा और परिवार में बेहतर भविष्य की उम्मीद है।
श्री गुप्ता ने कहा कि 650 शिक्षा केंद्रों तक पहुंचना इस यात्रा का समापन नहीं, बल्कि एक बड़े मिशन की शुरुआत के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने एक्ट टू ट्रांसफार्म फाउंडेशन, शिक्षकों, स्वयंसेवकों, समन्वयकों, अभिभावकों और सभी सहयोगियों को बधाई दी तथा कहा कि इस पहल ने यह साबित किया है कि स्पष्ट प्रतिबद्धता, नेक इरादे और सामुदायिक सहभागिता मिलकर समाज में सार्थक बदलाव ला सकते हैं।
इससे पहले, सांसद अनुराग ठाकुर ने राज्यपाल का स्वागत किया तथा एक्ट टू ट्रांसफार्म फाउंडेशन की 'एक से श्रेष्ठ' पहल के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

इस अवसर पर विधायक जे.आर. कटवाल, त्रिलोक जम्वाल तथा अन्य गणमान्य उपस्थित थे। 

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