हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना (चरण-II) जायका (कृषि) के अंतर्गत विकास खंड कुल्लू की ग्राम पंचायत हाट में निर्मित फलटनालह वहाव सिंचाई योजना का हस्तांतरण समारोह शनिवार को आयोजित किया गया।
राज्य परियोजना प्रबंधन इकाई के मुख्य सलाहकार बलजीत सिंह संधु ने प्रधान कृषक विकास संघ 'देवभूमि एग्री एसोसिएशन' के अध्यक्ष निम्मे राम तथा लाभार्थी किसानों की उपस्थिति में योजना का शुभारंभ एवं हस्तांतरण किया। इस
योजना के निर्माण पर 75.05 लाख रुपये की राशि खर्च की गई है। इससे लगभग 37.15 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा प्राप्त होगी तथा 132 किसान परिवार लाभान्वित होंगे। योजना का निर्माण निर्धारित समयावधि में पूरा किया गया है।
इस अवसर पर उप परियोजना निदेशक डॉ. राजेश ठाकुर, जिला परियोजना प्रबंधक मंडी डॉ. हेम राज वर्मा, खंड परियोजना प्रबंधक कुल्लू डॉ. जयंत रत्ना, परियोजना प्रबंधन सलाहकार से पोस्ट-हार्वेस्ट विशेषज्ञ डॉ. नरदेव ठाकुर एवं संस्थागत विकास विशेषज्ञ डॉ. आर.एस. ठाकुर सहित संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर बलजीत सिंह संधु ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र में आय बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीक, फसल विविधीकरण और सामूहिक प्रयासों को अपनाना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि कुल्लू जिले में शीघ्र ही नर्सरी पौधों के लिए उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किया जाना प्रस्तावित है। इसके माध्यम से किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री, आधुनिक नर्सरी तकनीक, उन्नत उत्पादन विधियों तथा तकनीकी मार्गदर्शन की सुविधा उपलब्ध होगी।
उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में सिंचाई जल की उपलब्धता खेती के लिए बड़ी चुनौती है। जायका परियोजना के माध्यम से सिंचाई ढांचे के विकास के साथ किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण तथा बाजार से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कृषक विकास संघ की भूमिका पर विशेष जोर देते हुए कहा कि किसान सामूहिक रूप से सिंचाई योजना के संचालन एवं रखरखाव की जिम्मेदारी निभाएं। उन्होंने कृषक विकास संघ के सदस्यों को प्रत्येक माह बैठक आयोजित करने, जल संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करने तथा योजना के नियमित रखरखाव को सुनिश्चित करने का आग्रह किया। साथ ही किसानों को कोल्ड स्टोर स्थापित करने और किसान उत्पादक संगठन गठित करने के लिए भी प्रेरित किया।
इस अवसर पर विशेष अतिथि उप परियोजना निदेशक डॉ. राजेश ने कहा कि फलटनाला सिंचाई योजना क्षेत्र के किसानों के लिए महत्वपूर्ण आधारभूत सुविधा है। उन्होंने कहा कि सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने के बाद किसानों के पास पारंपरिक फसलों तक सीमित रहने के बजाय फसल विविधीकरण और उच्च मूल्य वाली कृषि एवं बागवानी फसलों को अपनाने के अधिक अवसर उपलब्ध होंगे । उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे योजना को अपनी सामुदायिक संपत्ति समझकर इसके रखरखाव में सक्रिय भागीदारी निभाएं।
इससे पहले डॉ. जयंत रत्ना ने परियोजना के अंतर्गत कुल्लू जिले में किए जा रहे विभिन्न कार्यों की जानकारी दी और सिंचाई सुविधाओं के विकास का उद्देश्य किसानों को पर्याप्त जल उपलब्ध करवाकर उन्हें नगदी फसलों तथा फसल विविधीकरण के लिए प्रोत्साहित करना है। उन्होंने योजना के निर्माण में सहयोग के लिए कृषक विकास संघ एवं लाभार्थी किसानों का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर डॉ. राजेश ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना का मुख्य उद्देश्य किसानों की आय में वृद्धि, कृषि उत्पादकता में सुधार और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना है। परियोजना के माध्यम से किसानों को आधुनिक एवं टिकाऊ कृषि तकनीकों से जोड़ा जा रहा है। किसानों की क्षमता निर्माण के लिए प्रशिक्षण आयोजित किए जा रहे हैं तथा उन्हें कृषक विकास संघ,स्वयं सहायता समूह और किसान समूहों के माध्यम से संगठित किया जा रहा है। साथ ही किसान उत्पादक संगठनों के गठन को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
इस अवसर पर उप परियोजना निदेशक डॉ. राजेश विशेष अतिथि तथा डीपीएम मंडी डॉ. हेमराज वर्मा, पोस्ट-हार्वेस्ट इंजीनियर तृशान पुरोहित, निर्माण अभियंता सौरव कुमार, कृषि अधिकारी संजय कुमार, कृषि प्रसार अधिकारी ज्या प्रधा तथा आईईसी समन्वयक युवराज सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे।

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