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पर्यटन क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रही प्रदेश सरकार



पर्यावरण अनुकूल पर्यटन को दिया जा रहा प्रोत्साहन


हिमाचल पर्यटन क्षेत्र में एक अहम हस्ताक्षर रखता है। हिमाचल को हर मौसम में पर्यटकों के पसंदीदा गंतव्य के रूप में स्थापित करने के लिए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने सशक्त कदम उठाए है।
पर्यटन क्षेत्र को प्रोत्साहन और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने की सरकार की नीतियों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। प्रदेश की हसीन वादियां देशी और विदेशी पर्यटकों से सदैव गुलज़ार रहती हैं। प्रदेश सरकार पर्यटन क्षेत्र के विविध आयामों को नया स्वरूप प्रदान कर रही है। धार्मिक पर्यटन के लिए प्रसिद्ध हिमाचल को साहसिक पर्यटन के केन्द्र के रूप में भी स्थापित किया जा रहा है। प्रदेश के जलाशयों को लग्ज़री और एडवेंचर टूरिज्म के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस कड़ी में गोबिंद सागर झील में पहली बार क्रूज़, शिकारा, हाउस बोट, जेट स्की और वॉटर स्कूटर जैसी सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।
प्रदेश सरकार ने बिलासपुर के हरनौड़ा से ततापानी तक 30 किलोमीटर तक लम्बा क्रूज़ मार्ग विकसित करने का निर्णय लिया है। राज्य में वैश्विक स्तर की प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है जिससे साहसिक पर्यटन को नए पंख लग रहे हैं। हमीरपुर ज़िला के नादौन में ब्यास नदी पर एशियन राफ्टिंग चैंपियनशिप तथा शिमला ज़िला की सतलुज नदी पर एशियन राफ्टिंग चैपियनशिप का आयोजन आकर्षण का केन्द्र रहते है।
कांगड़ा ज़िला का बीड़ बिलिंग दुनियाभर के पैराग्लाईडरों के लिए स्वर्ग के समान है। राज्य की अन्य जगहों में भी पैराग्लाईडिंग संभावनाओं को तलाशा जा रहा है। इस क्रम में शिमला ज़िला के जुन्गा में पैराग्लाईडिंग वर्ल्ड कप का आयोजन किया गया।
राज्य में ईको-टूरिज्म की अपार संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए नई ईको-टुरिज्म नीति लागू की गई है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण स्तर पर युवाओं के लिए रोज़गार और स्वरोज़गार के अवसर सृजित करना है।
मुख्यमंत्री की दूरदर्शी सोच से शिपकी लॉ से सीमावर्ती पर्यटन शुरू किया गया है। इसके साथ-साथ हिमाचल को एस्ट्रो-टूरिज्म गंतव्य के रूप में विकसित करने के लिए प्रदेश सरकार ने लाहौल स्पीति के काज़ा में स्टार गेजिंग सुविधा आरम्भ की गई है।
जिला कांगड़ा को पर्यटन राजधानी घोषित किया गया है और महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को अमलीजामा पहनाया जा रहा है। राज्य में पर्यटकों की संख्या में वृद्धि करने के दृष्टिगत कांगड़ा हवाई अड्डे कि विस्तार प्रक्रिया जारी है। प्रदेश के सभी ज़िला मुख्यालयों में हैलीपोर्ट के लिए कार्य प्रगति पर है। कांगड़ा जिला के देहरा उप मण्डल के बनखंडी में 619 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से निर्मित हो रहा दुर्गेश अरण्य वन्य प्राणी उद्यान पर्यटकों और स्थानीय लोगांे के लिए विशेष आर्कषण का केंन्द्र बनकर उभरेगा।
प्रदेश सरकार की योजनाएं इस क्षेत्र में युवाओं के लिए स्वरोज़गार की नई राहें खोल रही हैं। मुख्यमंत्री पर्यटन स्टार्ट-अप योजना के तहत नई पर्यटन इकाईयां स्थापित करने और मौजूदा होमस्टे इकाईयों को विस्तार प्रदान करने के लिए ऋण पर वित्तीय सहायता दी जाएगी। युवाओं को शहरी क्षेत्रों में 3 प्रतिशत, ग्रामीण क्षेत्रों में 4 प्रतिशत और जनजातीय क्षेत्रों में 5 प्रतिशत तक ब्याज उपदान की सुविधा मिलेगी।
प्रदेश की राजधानी शिमला में पर्यटकों की आमद में वृद्धि के दृष्टिगत कई पर्यटन परियोजनाएं प्रगति पर हैं। शिमला शहर के सौंदर्यीकरण के दृष्टिगत 246 करोड़ रुपये लागत की भूमिगत यूटिलिटी डक्ट परियोजना क्रियान्वित की जा रही है। इस परियोजना का उद्देश्य शहर की अधोसंरचना प्रणाली का आधुनिकीकरण, शहरी सौंदर्यीकरण तथा नागरिकों के लिए सुविधाओं का और विस्तार करना है। यह परियोजना शिमला के कायाकल्प की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील पत्थर साबित होगी। इससे स्थानीय लोगों तथा पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिलेगा। राज्य सरकार आधुनिक, सतत् एवं नागरिक-केंद्रित शहरी अवसंरचना के विकास के लिए प्रतिबद्ध है।
प्रदेश सरकार द्वारा राज्य में पर्यटन क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए की जा रहीं नवोन्मेषी पहल निश्चित रूप से प्रदेश में आर्थिक सशक्तिकरण के साथ-साथ विकास को नए आयाम प्रदान करेंगी।  

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