इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने वानिकी, पर्यावरण प्रबंधन एवं ईको-टूरिज्म से संबंधित महत्वपूर्ण प्रकाशनों का विमोचन भी किया। इनमें वन विभाग के अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों के लिए तैयार की गई फील्ड हैंडबुक 'वन बोध', प्रधान मुख्य अरण्यपाल डॉ. संजय सूद द्वारा लिखित 'एनवायरनमेंटल मैनेजमेंट एंड रेगुलेशंस', 'फॉरेस्ट्री प्रोजेक्ट्सः फॉरेस्ट कंजर्वेशन, लाइवलीहुड इम्प्रूवमेंट एंड इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट', जिसमें जेआईसीए, केएफडब्ल्यू और आईडीपी परियोजनाओं के तहत किए जा रहे कार्यों का विवरण शामिल है। उन्होंने हिमाचल प्रदेश के 75 ईको-टूरिज्म स्थलों पर आधारित कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया, जिसमें राज्य के प्रमुख पर्यावरणीय पर्यटन स्थलों का आकर्षक परिचय प्रस्तुत किया गया है।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि यह प्रकाशन वन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों, शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं तथा पर्यावरण संरक्षण में रुचि रखने वाले सभी लोगों के लिए उपयोगी सिद्ध होंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पुस्तकें वन प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण और ईको-टूरिज्म के क्षेत्रों में ज्ञान और जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने युवाओं को राष्ट्र का भविष्य बताते हुए उनसे पर्यावरण की सुरक्षा और संरक्षण के लिए अग्रणी भूमिका निभाने तथा एक हरित एवं सतत भविष्य के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।
विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में मुख्यमंत्री ने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय पोर्टमोर के विद्यार्थियों और 'चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट' के बच्चों को पौधे भी भेंट किए।
इस अवसर पर विधायक विनोद सुल्तानपुरी, सुदर्शन बबलू और हरदीप बावा, नगर निगम शिमला के महापौर सुरेन्द्र चौहान, हिमाचल प्रदेश राज्य वन विकास निगम के उपाध्यक्ष के.एस. खाची, एचपीसीसी के महासचिव विनोद जिंटा, मुख्य सचिव के.के. पंत, प्रधान मुख्य अरण्यपाल डॉ. संजय सूद और अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

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