राजकीय महाविद्यालय पनारसा में "विरासत संरक्षण के माध्यम से शिक्षा को बढ़ावा" विषय पर 7 दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है, जो 14 मई से 21 मई तक चलेगी। यह कार्यशाला ऑनलाइन तथा ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आयोजित की जा रही है। कार्यक्रम का आयोजन हेरिटेज फ़ाउंडेशन, जलगाँव (महाराष्ट्र) एवं राजकीय महाविद्यालय पनारसा के मध्य हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) के अंतर्गत किया जा रहा है।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों एवं युवाओं को भारत की सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक धरोहरों तथा पारंपरिक मूल्यों के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति जागरूक करना है। साथ ही नई पीढ़ी को विरासत संरक्षण के महत्व से जोड़ते हुए शिक्षा और संस्कृति के बीच गहरे संबंध को समझाना भी इसका प्रमुख उद्देश्य है।
कार्यक्रम में हेरिटेज फ़ाउंडेशन, जलगाँव (महाराष्ट्र) से प्रख्यात स्रोतविद् भुजंग रामाराव बोवडे एवं श्रीमती उषा बोवडे ऑफलाइन माध्यम से महाविद्यालय परिसर में उपस्थित रहकर प्रतिभागियों का मार्गदर्शन करेंगे। दोनों विशेषज्ञ सांस्कृतिक विरासत संरक्षण, ऐतिहासिक स्थलों के महत्व तथा परंपराओं के संरक्षण से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगे।
इस कार्यशाला में भारत के साथ-साथ विभिन्न देशों के प्रतिभागी भी ऑनलाइन माध्यम से जुड़ रहे हैं। श्रीलंका, बांग्लादेश, इंग्लैंड, थाईलैंड, दक्षिण कोरिया एवं ऑस्ट्रेलिया सहित अन्य देशों के शिक्षाविद्, शोधार्थी एवं विद्यार्थी इसमें सहभागिता करेंगे। इससे प्रतिभागियों को वैश्विक स्तर पर सांस्कृतिक विरासत संरक्षण के विभिन्न आयामों को समझने का अवसर प्राप्त होगा।
कार्यशाला के दौरान विरासत संरक्षण, सांस्कृतिक पहचान, ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण में युवाओं की भूमिका, पारंपरिक ज्ञान प्रणाली तथा आधुनिक शिक्षा में सांस्कृतिक मूल्यों के समावेश जैसे विषयों पर व्याख्यान, संवाद एवं चर्चाएँ आयोजित की जाएंगी।
महाविद्यालय प्रशासन के अनुसार, इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों में अपनी संस्कृति एवं परंपराओं के प्रति सम्मान एवं जिम्मेदारी की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संवाद स्थापित होने से विद्यार्थियों को विभिन्न देशों की सांस्कृतिक विरासत एवं संरक्षण पद्धतियों की जानकारी भी प्राप्त होती है।
इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. उरसेम लता, डॉ. पूजा शर्मा, डॉ. लीना वैद्य, डॉ. कविता कटोच, प्रो. सुरेश कुमार, पुस्तकालय अध्यक्षा बिंदु सूर्यवंशी तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी एवं शोधार्थी उपस्थित रहेंगे।

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