मनाली, 22 अप्रैल — उपमंडल मनाली में आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़, संगठित एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से इन्सिडेंट रिस्पॉन्स सिस्टम पर कार्यशाला का आयोजन उपमंडलाधिकारी मनाली गुंजित सिंह चीमा की अध्यक्षता में किया गया।
कार्यशाला में विभिन्न विभागों के अधिकारियों, कर्मचारियों तथा जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले कर्मियों की सक्रिय भागीदारी रही।
कार्यशाला का उद्देश्य आपदा की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया, बेहतर समन्वय, संसाधनों के कुशल प्रबंधन तथा प्रभावी नेतृत्व सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रशिक्षित करना था, ताकि किसी भी आपात स्थिति में जन-धन की हानि को न्यूनतम किया जा सके।
उपमंडलाधिकारी ने कहा कि इन्सिडेंट रिस्पॉन्स सिस्टम एक वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित ढांचा है, जो आपदा प्रबंधन के दौरान विभिन्न विभागों के बीच स्पष्ट भूमिका निर्धारण, प्रभावी कमांड एवं त्वरित निर्णय लेने में सहायक सिद्ध होता है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में आईआरएस प्रणाली का प्रभावी क्रियान्वयन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने आपदा के समय निर्धारित दायित्वों के अनुरूप तत्परता से कार्य करने तथा आपसी समन्वय को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही।
उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन प्रशासन के साथ सामुदायिक भागीदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर तक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर आम नागरिकों, विशेषकर युवाओं एवं विद्यार्थियों को आपदा प्रबंधन के प्रति जागरूक करें।
कार्यशाला के मुख्य वक्ता दिलीप कुमार, मास्टर ट्रेनर (इन्सिडेंट रिस्पॉन्स सिस्टम, भारत सरकार) ने प्रतिभागियों को आईआरएस की संरचना, कार्यप्रणाली एवं विभिन्न घटकों की विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि इन्सिडेंट कमांडर की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, जो समस्त कार्यों का नेतृत्व करता है। इसके अतिरिक्त ऑपरेशन सेक्शन राहत एवं बचाव कार्यों का संचालन करता है, प्लानिंग सेक्शन सूचनाओं के विश्लेषण एवं भविष्य की कार्ययोजना तैयार करता है, लॉजिस्टिक्स सेक्शन आवश्यक संसाधनों एवं सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करता है।
उन्होंने आपदा के समय संचार व्यवस्था की अहमियत पर विशेष बल देते हुए कहा कि सूचना का त्वरित आदान-प्रदान ही प्रभावी प्रबंधन की कुंजी है। उन्होंने आधुनिक तकनीकों, जैसे वायरलेस संचार, मोबाइल नेटवर्क एवं अन्य माध्यमों के समुचित उपयोग पर जोर दिया।
दिलीप कुमार ने हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन, बादल फटना, बाढ़ एवं सड़क अवरोध जैसी परिस्थितियाँ अक्सर उत्पन्न होती हैं, जिनसे निपटने के लिए पूर्व तैयारी एवं स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित मानव संसाधन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सुझाव दिया कि ग्राम स्तर पर स्वयंसेवकों के समूह तैयार किए जाएं तथा स्कूलों एवं कॉलेजों में नियमित रूप से आईआरएस आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
कार्यशाला में विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने के लिए मॉक ड्रिल, केस स्टडी तथा समूह चर्चा भी आयोजित की गई, जिसके माध्यम से प्रतिभागियों को वास्तविक परिस्थितियों से अवगत कराया गया और उनकी भूमिका को स्पष्ट किया गया।
इस अवसर पर जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, हिमाचल पथ परिवहन निगम, हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड, लोक निर्माण विभाग, जल शक्ति विभाग, होम गार्ड, अग्निशमन सेवा, स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, बीएसएनएल सहित अन्य विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं आशा कार्यकर्ताओं ने भी भाग लेकर आपदा प्रबंधन की बारीकियों को समझा और अपने-अपने स्तर पर इसकी उपयोगिता को जाना।

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