नई दिल्ली: कोयला, खान और इस्पात संबंधी संसदीय स्थायी समिति को प्रतिष्ठित संसद रत्न पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया है। समिति के चेयरमैन और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने इस सम्मान पर खुशी व्यक्त करते हुए इसे समिति के सभी सदस्यों तथा सचिवालय के अधिकारियों और कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों को समर्पित किया।
अनुराग ठाकुर ने सोशल मीडिया पर साझा किए अपने बयान में कहा कि संसद रत्न पुरस्कार भारतीय लोकतंत्र में एक गैर-सरकारी पहल के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। उन्होंने कहा कि समिति को यह प्रतिष्ठित सम्मान मिलना उनके लिए चेयरमैन के रूप में हर्ष और संतोष का विषय है।
सामूहिक प्रयासों को समर्पित किया सम्मान
अनुराग ठाकुर ने कहा कि यह पुरस्कार किसी एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि समिति में काम कर रहे सभी सदस्यों और सचिवालय की टीम के सामूहिक तालमेल का परिणाम है। उन्होंने सम्मान को समिति के साथी सदस्यों और सचिवालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को समर्पित किया।
उनके मुताबिक, यह सम्मान समिति के सदस्यों और कर्मचारियों की कठोर शोध, सामूहिक कार्य और द्विदलीय विधायी निगरानी को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के दृष्टिकोण से प्रेरित है पुरस्कार
अनुराग ठाकुर ने संसद रत्न पुरस्कार की पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पहल पूर्व राष्ट्रपति और वैज्ञानिक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के दृष्टिकोण से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि पुरस्कार संसदीय प्रदर्शन के मूल्यांकन में नागरिक समाज के दृष्टिकोण को सामने रखता है।
उनके अनुसार, संसद रत्न पुरस्कार संसदीय कार्यप्रणाली और प्रदर्शन का मूल्यांकन निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है। यही वजह है कि समिति को मिला यह सम्मान संसदीय निगरानी और लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
संसदीय निगरानी की भूमिका पर जोर
संसदीय स्थायी समितियां विधायी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ये समितियां संबंधित मंत्रालयों और विभागों के कामकाज की समीक्षा करने, नीतिगत मुद्दों की पड़ताल करने तथा विभिन्न विषयों पर विस्तृत अध्ययन और सिफारिशें देने का कार्य करती हैं।
कोयला, खान और इस्पात संबंधी स्थायी समिति से जुड़े क्षेत्रों का देश की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक विकास और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन से सीधा संबंध है। ऐसे में समिति के कामकाज को मिला सम्मान उसके संसदीय परीक्षण और निगरानी संबंधी कार्यों की ओर भी ध्यान आकर्षित करता है।
अनुराग ठाकुर ने अपने संदेश में इस बात पर विशेष जोर दिया कि यह उपलब्धि समिति के सदस्यों और सचिवालय की टीम के बीच बेहतर समन्वय तथा शोध-आधारित संसदीय कार्य का परिणाम है। उन्होंने कहा कि पुरस्कार उन्हें और समिति के अन्य सदस्यों को लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति अपनी जिम्मेदारी को और मजबूती से निभाने के लिए प्रेरित करेगा।
संसद रत्न पुरस्कार 2026 के जरिए समिति को मिला यह सम्मान ऐसे समय में सामने आया है जब संसदीय समितियों की विशेषज्ञता, विस्तृत समीक्षा और विधायी निगरानी को लोकतांत्रिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण माना जाता है।
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