स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि रोगी देखभाल सेवाओं को सुदृढ़ करने और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र के कायाकल्प की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े तीन वर्षों में स्वास्थ्य अधोसंरचना को सुदृढ़ करने के लिए कई महत्त्वपूर्ण पहल की है। देश के प्रतिष्ठित स्वास्थ्य संस्थानों की तर्ज पर राज्य के चिकित्सा संस्थानों को स्तरोन्नत किया जा रहा है। सरकार के प्रयासों से राज्य में अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाई जा रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने अटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सुपर स्पेशियलिटीज चमियाणा, आईजीएमसी शिमला और टांडा चिकित्सा महाविद्यालय में आधुनिक ऑटोमेटिड लैब स्थापित करने के लिए 75 करोड़ रुपये की राशि जारी की है। उन्होंने कहा कि टांडा चिकित्सा महाविद्यालय में पीजी की सीटों में वृद्धि, मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलॉजी कोर्सिस (एमएलटी) और नर्सिंग की छात्राओं की सुविधा के लिए बेहतर अधोसंरचना को सुनिश्चित किया जाएगा। महाविद्यालय में मरीजों की सुविधा के लिए हाई-परफॉर्मेंस लिक्विड क्रोमैटोग्राफी (एचपीएलसी), कटीन्यूअस रीनल रिपलेसमंेट थेरपी (सीआरआरटी) और हीमोडायाफिलट्रेशन (एचडीएफ) डाईलिसिस मशीनें स्थापित की गई है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा महाविद्यालय में लोगों की सुविधा के लिए पार्किंग की सुविधा के विस्तार की दिशा में भी कार्य किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के चिकित्सा महाविद्यालयों में दशकों पुरानी मशीनों एवं उपकरणों के स्थान पर नई अत्याधुनिक मशीनों और उपकरणों को स्थापित किया जा रहा है। स्वास्थ्य संस्थानों में अत्याधुनिक एमआरआई, सीटी स्कैन, डिजिटल रेडियोग्राफी और डिजिटल मैमोग्राफी सहित आधुनिक उपकरण स्थापित किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य संस्थानों में बड़े स्तर पर डाक्टरों, प्रोफेसरों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों को भर्ती किया जा रहा है जिससे मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी। प्रदेश सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र के सुदृढ़ीकरण के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिशा में ठोस निर्णय लिए जा रहे है।
बैठक में विशेष सचिव स्वास्थ्य डॉ. अश्वनी शर्मा और वर्चुअल माध्यम से टांडा से एचपीटीडीसी के अध्यक्ष आर.एस. बाली और टांडा महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. मिलाप तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

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