मंडी, 27 जून। अतिरिक्त उपायुक्त गुरसिमर सिंह की अध्यक्षता में आज यहां बाल देखभाल और संरक्षण से जुड़े सभी हितधारकों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों को अक्षरशः धरातल पर उतारने बारे चर्चा की गई।
बैठक में बताया गया कि देश में हर वर्ष लगभग 90 हज़ार बच्चे गुम हो जाते हैं जिनमें 70 प्रतिशत के करीब लड़कियां होती हैं। ज्यादातर ये बच्चे मानव तस्करी का शिकार होते हैं। अपरहण किए या चुराए गए इन बच्चों के यौन शोषण, भीख मंगवाने, मानव अंग की अवैध बिक्री या नशीले पदार्थों की तस्करी इत्यादि में धकेलने की संभावनाएं कई गुणा बढ़ जाती हैं। गैरकानूनी कार्य करने वालों के लिए ऐसे बच्चे आसान शिकार (सॉफ्ट टारगेट) होते हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने इसका कड़ा संज्ञान लिया है तथा सभी राज्यों को इसे बड़ी सामाजिक समस्या बताते हुए इससे निपटने के लिए आवश्यक निर्देश दिए हैं।
गुरसिमर सिंह ने कहा कि इस बारे में जिला मंडी में आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि बच्चों को इस दल-दल में फंसने से बचाया जा सके। मंडी जिला में लापता बच्चों को जल्दी ढूंढने के लिए प्रभावी कार्य योजना बनाई जा रही है। उन्होंने सभी हितधारकों को अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी निभाते हुए इन निर्देशों की अक्षरशः अनुपालना सुनिश्चित करने को कहा है। उन्होंने बताया कि इस तरह के अपराधों से निपटने के लिए मंडी महिला थाने में एक एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग इकाई की स्थापना की गई है। इसके अतिरिक्त जिला के सभी 15 थानों की मिशन वात्सल्य के तहत मैपिंग भी कर ली गई है।
बैठक में सहायक आयुक्त कुलदीप सिंह पटियाल, जिला बाल संरक्षण अधिकारी एन. आर. ठाकुर, ज़िला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अरिंदम रॉय, बाल कल्याण समिति की अध्यक्षा अलकनंदा हांडा, पुलिस निरीक्षक पदमा चंदेल, प्रोबेशन ऑफिसर रमा कुमारी के अलावा शिक्षा, पुलिस, स्वास्थ्य, जिला विधिक एवं न्यायिक प्राधिकरण, ज़िला बाल संरक्षण इकाई, महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भाग लिया।
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