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किसानों को आधुनिक तकनीक व फसल विविधीकरण अपनाने की सलाह



 *बयासर टू मापक प्रवाह सिंचाई योजना का हस्तांतरण, 159 किसानों को मिलेगा लाभ* 

कुल्लू। हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना (HPCDP Phase-II, JICA-ODA) के अंतर्गत निर्मित बयासर टू मापक (FIS Biasar to Mapak) प्रवाह सिंचाई योजना का हस्तांतरण कार्यक्रम बयासर गांव में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य योजना को औपचारिक रूप से स्थानीय कृषक विकास संघ (KVA) को सौंपना तथा किसानों को इसके संचालन और रखरखाव के लिए सशक्त बनाना था। इस अवसर पर परियोजना निदेशक डॉ. सुनील चौहान मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. सुनील चौहान ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में खेती के लिए पानी की उपलब्धता लंबे समय से एक बड़ी चुनौती रही है, लेकिन इस प्रकार की सिंचाई योजनाएं किसानों के लिए नए अवसर प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना के माध्यम से सरकार केवल सिंचाई ढांचा विकसित नहीं कर रही है, बल्कि किसानों को आधुनिक तकनीकों, बेहतर बाजार व्यवस्था और आय बढ़ाने के नए विकल्पों से भी जोड़ रही है।

उन्होंने किसानों को आय बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में उत्पादित सब्जियों और अन्य कृषि उत्पादों के संरक्षण के लिए कोल्ड स्टोरेज स्थापित करने की दिशा में भी प्रयास किए जाने चाहिए। इससे किसान अपनी उपज को सुरक्षित रख सकेंगे और उचित समय पर बेहतर कीमत मिलने पर बाजार में बेच पाएंगे।

डॉ. चौहान ने सुझाव दिया कि स्थानीय स्तर पर रिटेल आउटलेट अथवा किसान बिक्री केंद्र स्थापित किए जाएं, जहां किसान अपने स्थानीय और पारंपरिक उत्पादों को "स्वदेशी उत्पाद" के रूप में सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचा सकें। उन्होंने कहा कि कुल्लू जैसे पर्यटन क्षेत्र में ऐसे उत्पाद पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं, जिससे किसानों को उचित मूल्य मिलेगा और स्थानीय उत्पादों को नई पहचान मिलेगी।

उन्होंने किसानों से यह भी आग्रह किया कि कृषक विकास संघ (KVA) को सक्रिय बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। संघ की नियमित बैठकें आयोजित कर किसान आपसी विचार-विमर्श के माध्यम से क्षेत्र के विकास के लिए नई योजनाएं बना सकते हैं। सामूहिक प्रयासों से सिंचाई योजना का बेहतर प्रबंधन, उत्पादों की मार्केटिंग तथा खेती से जुड़े अन्य कार्य अधिक प्रभावी ढंग से किए जा सकते हैं।

उन्होंने अंत में किसानों से आह्वान किया कि वे इस सिंचाई योजना का पूर्ण लाभ उठाते हुए फसल विविधीकरण, आधुनिक खेती और सामूहिक विपणन को अपनाएं, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो और क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके।

इस सिंचाई योजना के निर्माण पर लगभग 86.02 लाख रुपये का अनुमानित बजट निर्धारित किया गया था, जिसमें से करीब 82.77 लाख रुपये व्यय किए जा चुके हैं। योजना के अंतर्गत कुल 47.81 हेक्टेयर सकल कमांड क्षेत्र (GCA) आता है, जबकि 34.80 हेक्टेयर क्षेत्र (CCA) को सुनिश्चित सिंचाई सुविधा प्रदान की गई है। इस परियोजना के माध्यम से 110 परिवारों के 159 किसान सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। योजना के लिए सिंचाई जल का मुख्य स्रोत बियासर नाला है।

परियोजना के क्रियान्वयन से पहले क्षेत्र में सिंचाई तीव्रता लगभग 35.5 प्रतिशत थी, जिसे बढ़ाकर 203 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

इस अवसर पर डीपीएमयू मंडी के डॉ. हेमराज वर्मा, एसएमएस डॉ. खुब राम, बीपीएम कुल्लू डॉ. जयंत रत्ना, कंस्ट्रक्शन इंजीनियर अंकुश सहित विभाग का अन्य स्टाफ भी उपस्थित रहा। कार्यक्रम में उपस्थित किसानों ने योजना के प्रति उत्साह व्यक्त करते हुए कहा कि सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने से क्षेत्र में सब्जी उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और उनकी आय में वृद्धि होगी।

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