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सल्ली घाटी में ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक व्यंजनों से हुआ विद्यार्थियों का स्वागत, बिच्छू बूटी की सब्ज़ी बनी आकर्षण

 राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला के टूर एंड ट्रैवल विभाग का शाहपुर के पर्यटन स्थलों पर शोध भ्रमण




धर्मशाला, 9 मार्च।
राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला के टूर एंड ट्रैवल विभाग के विद्यार्थियों का दो दिवसीय शैक्षणिक एवं शोधपरक भ्रमण शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न पर्यटन स्थलों पर सम्पन्न हुआ।

शाहपुर के विधायक एवं उपमुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया ने कॉलेज प्राचार्य प्रो. राकेश पठानिया की उपस्थिति में विद्यार्थियों को धारकण्डी क्षेत्र के लिए हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था ।

इस अवसर पर विधायक केवल सिंह पठानिया ने कहा कि शाहपुर क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटन संभावनाओं से भरपूर है। यह भ्रमण विद्यार्थियों को पर्यटन के व्यावहारिक पहलुओं को समझने और पर्यटन विकास के लिए नए विचार प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान करेगा।

उन्होंने कहा कि बेहतर और नवाचारपूर्ण सुझाव देने वाले विद्यार्थियों को विधानसभा सत्र के दौरान सम्मानित  भी किया जाएगा।

भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने सल्ली घाटी, बोह घाटी और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर ग्रामीण पर्यटन, सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक पर्यटन से जुड़े विभिन्न पहलुओं का अध्ययन किया।

सल्ली घाटी पहुंचने पर स्थानीय लोगों द्वारा विद्यार्थियों का ढोल-नगाड़ों के साथ पारंपरिक स्वागत किया गया। इस दौरान विद्यार्थियों को हिमाचली व्यंजनों का स्वाद भी चखने को मिला, जिसमें बिच्छू बूटी की सब्ज़ी, कांगड़ी खट्टा, मदरा और बुरांश के फूलों की चटनी विशेष आकर्षण का केंद्र रहे।

विद्यार्थियों ने रुलहेड बोह में स्थित विश्व कुलदेवी मलह माता सुकराला देवी मंदिर में माथा टेककर आशीर्वाद भी प्राप्त किया और धार्मिक पर्यटन के महत्व को समझा। इसके अलावा मोरछ गांव में ग्रामीण पर्यटन से जुड़े पहलुओं का अध्ययन करते हुए स्थानीय लोगों से बातचीत कर महत्वपूर्ण जानकारियां भी प्राप्त कीं।

भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने ट्राउट मछली उत्पादन इकाई का भी अवलोकन किया तथा प्रसिद्ध पर्यटक स्थल खबरू महादेव मंदिर में भी दर्शन किए।

टूर एंड ट्रैवल विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अमित कटोच और तरसेम जरयाल ने बताया कि इस शैक्षणिक भ्रमण से विद्यार्थियों को ग्रामीण, सांस्कृतिक और सतत पर्यटन के विभिन्न आयामों को व्यवहारिक रूप से समझने का अवसर मिला।

विद्यार्थी इस अनुभव के आधार पर अपनी शोध रिपोर्ट तैयार करेंगे, जिसे महाविद्यालय में जमा किया जाएगा ।
शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों के लिए न केवल एक यादगार अनुभव रहा बल्कि ग्रामीण पर्यटन, शोध और स्थानीय संस्कृति को समझने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी सिद्ध हुआ।

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