हरियाणा के फरीदाबाद में चल रहे 39वें सूरजकुंड इंटरनेशनल क्राफ्ट मेले (31 जनवरी–15 फरवरी 2026) में इस बार हिमाचल प्रदेश ने अपनी अलग ही पहचान बनाई है। गुणवत्ता, स्वाद और भरोसे के दम पर हिमाचली ऑर्गेनिक व पारंपरिक उत्पादों की जबरदस्त मांग देखने को मिल रही है।
दिल्ली की ठंड में पहाड़ की गरमाहट
राष्ट्रीय राजधानी की सर्दी में कांगड़ा और चंबा के गद्दियों के पट्टू, ऊनी शाल, टोपी और मफलर खरीदारों की पहली पसंद बने हुए हैं—अपनी विश्वसनीयता और टिकाऊ गरमाहट के लिए पहले से ही मशहूर।
सेहत का सुपरफूड बना ‘सी बकथॉर्न’ जूस
प्रदूषण से जूझ रही दिल्ली में सी बकथॉर्न जूस सेहत के प्रति जागरूक लोगों में खासा लोकप्रिय है। डिमांड इतनी कि कई खरीदार सालभर की नियमित सप्लाई भी मांग रहे हैं।
प्रीमियम पहाड़ी उत्पाद, प्रीमियम कीमतें
पांगी–भरमौर और ऊपरी हिमालयी क्षेत्रों के चिलगोज़ा, थांगी, काग़ज़ी अखरोट, शिलाजीत ऊंचे दामों पर बिक रहे हैं। भरोसेमंद स्टोर्स की कमी के कारण ऐसे मेलों में इनका क्रेज और बढ़ जाता है।
लक्ज़री की पसंद, सेहत की पहचान
गुच्छी, सफ़ेद शहद, अनारदाना और पहाड़ी शाही जीरा अपने औषधीय गुणों के कारण पाँच सितारा होटलों, क्लबों और फार्महाउसों में स्टेटस सिंबल बनते दिख रहे हैं।
साथ ही कांगड़ा का लाल राजमा और गुग्गल धूप भी खूब सराहे जा रहे हैं।
भरोसा ही असली ब्रांड
इन्दुनाग किसान उत्पादन संगठन (समरा, भरमौर) के उद्यमी प्रवीण कुमार के मुताबिक, ऐसे मंच पहाड़ी उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाते हैं। हिमाचली स्टॉल पर ग्राहक शांत, सौम्य रहते हैं—क्योंकि उन्हें गुणवत्ता पर पूरा भरोसा होता है और मोलभाव भी कम।

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