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रंग लाने लगे ‘सुख की सरकार’ के प्रयास



प्राकृतिक खेती से आत्मनिर्भरता की मिसाल बने टिक्करी मुशैहरा के अजय कुमार,

सगनेहड़ के कमला समूह की महिलाएं भी दे रहीं बढ़ावा

जोगिंदर नगर।
प्रदेश सरकार द्वारा प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन देने की नीति अब ज़मीनी स्तर पर सकारात्मक परिणाम दिखाने लगी है। ‘सुख की सरकार’ के सहयोग और मार्गदर्शन से जोगिंदर नगर उपमंडल के विकास खण्ड चौंतड़ा के गांव टिक्करी मुशैहरा निवासी अजय कुमार तथा ग्राम पंचायत सगनेहड़ की कमला देवी के नेतृत्व वाला महिला समूह आत्मनिर्भरता की सशक्त मिसाल बनकर उभरे हैं। सरकार की सहायता, प्रशिक्षण और किसानों की मेहनत ने उनकी आमदनी बढ़ाने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दी है।

गांव टिक्करी मुशैहरा के अजय कुमार वर्ष 2003 से प्राकृतिक खेती से जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि शुरुआती वर्षों में प्राकृतिक रूप से उगाई गई फसलों के विपणन में उन्हें अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उस समय न तो बाजार की समुचित व्यवस्था थी और न ही फसलों के उचित दाम तय थे। वर्तमान राज्य सरकार द्वारा प्राकृतिक उत्पादों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय किए जाने से अब किसानों को उनकी मेहनत का सही मूल्य मिलने लगा है। हाल ही में अजय कुमार ने दो क्विंटल मक्की सरकार को एमएसपी पर बेचकर छह हजार रुपये से अधिक की आमदनी अर्जित की। उन्होंने कृषक हितैषी नीतियों के लिए राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया।

इसी तरह ग्राम पंचायत सगनेहड़ की कमला देवी वर्ष 2018 से प्राकृतिक खेती से जुड़ी हैं। रासायनिक खाद और कीटनाशकों के बिना खेती करने से उन्हें न केवल आर्थिक लाभ हुआ है, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी फायदे भी मिले हैं। कमला देवी के साथ लगभग 20 महिलाओं का एक समूह सामूहिक रूप से प्राकृतिक खेती को आगे बढ़ा रहा है। इस समूह ने दो क्विंटल मक्की और छह क्विंटल गेहूं सरकार को एमएसपी पर बेचा। इसके अतिरिक्त प्रति क्विंटल दो रुपये के हिसाब से परिवहन किराया भी दिया गया, जिससे कमला समूह को सरकार द्वारा कुल 37 हजार 200 रुपये का भुगतान किया गया।

अजय कुमार और कमला समूह की गतिविधियां केवल खाद्यान्न उत्पादन तक सीमित नहीं हैं। वे प्राकृतिक रूप से सब्जियां, रागी और अन्य फसलें भी उगा रहे हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आमदनी प्राप्त हो रही है। अधिकारियों के अनुसार, कमला समूह को आत्मा परियोजना के तहत गांव में ही दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित कर प्राकृतिक खेती की आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया था। प्रशिक्षण के बाद समूह द्वारा प्राकृतिक रूप से तैयार की गई रागी को व्यापारी अच्छे दामों पर खरीद रहे हैं।

प्रदेश सरकार ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मक्की का एमएसपी 40 रुपये प्रति किलो, गेहूं का 60 रुपये प्रति किलो और प्राकृतिक हल्दी का मूल्य 90 रुपये प्रति किलो निर्धारित किया है। इससे क्षेत्र के किसानों का रुझान तेजी से प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ रहा है।

कमला देवी का कहना है कि प्राकृतिक खेती से न केवल आमदनी का बेहतर साधन मिलता है, बल्कि परिवार के लिए शुद्ध और सुरक्षित भोजन भी उपलब्ध होता है। उन्होंने आम जनता से अधिक से अधिक प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान किया।

अजय कुमार और कमला समूह की यह सफलता कहानी इस बात का प्रमाण है कि सरकार की सही नीतियां, प्रशिक्षण, प्रोत्साहन और किसानों की मेहनत मिलकर प्राकृतिक खेती को ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बना सकती हैं।

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